Tuesday, August 3, 2021

माँ की नौकरी गई तो 14 साल का सुभान चाय बेचकर खुद की पढ़ाई के साथ ही परिवार का खर्च उठा रहा है

कहते है, समय किसी का नहीं है। कब किसका वक़्त बदल जाए यह कोई नहीं जानता। जिस प्रकार सभी लोग अपने जीवन में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे थे। सभी लोग अपने रोजमर्रा की जीवन में इतने व्यस्त हो गए थे, कि उन्हें बाकी दुनिया में क्या हो रहा है कुछ पता नहीं था। पर एक महामारी ने सबका जीवन अस्त व्यस्त कर दिया। जी हां करोना वायरस और देश में हुए लॉकडाउन ने किसी को नहीं छोड़ा चाहे वह अमीर हो या फिर गरीब। ये बात अलग है कि इससे सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब मजदूर हुए हैं। करोना वायरस की वजह से जहां कितने लोगों की जानें चली गई वहीं इस वक़्त हुए लॉकडॉउन से कितने लोग अपने नौकरी से हाथ धो बैठे। आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही परिवार की है, जिनके घर में केवल एक ही सदस्य कमाने वाला था और उसकी भी नौकरी चली गई, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी 14 वर्ष के बेटे ने उठाया।

एक 14 वर्ष का लड़का जिसका नाम सुभान है। सुभान जब दो साल का था तभी उनके पिता का देहांत हो गया। उसके बाद से ही इनकी मां ने घर चलाने के लिए स्कूल बस (school Bus) में अटेंडेंट का कार्य करने लगी। करोना वायरस के वक़्त हुए लॉकडाउन में इनकी मां की नौकरी चली गई। सुभान के परिवार में केवल इनकी मां ही थी जो नौकरी कर रही थी। इनकी नौकरी चले जाने के बाद सुभान ने चाय बेचने को सोचा और फिर इस कार्य की शुरुआत की। जिस उम्र में सभी बच्चे अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती करते हैं, वहीं सुभान ने अपने परिवार की पूरी जिम्मेदारी अपने सर ले ली। सुभान ने नागपाडा, भेंडी बाजार और मुंबई की बाकी इलाकों में चाय देने का कार्य शुरू किया।

लॉकडॉउन के दौरान ऐसे ही ना जाने कितने घर की आर्थिक स्थिति बहुत हद तक ख़राब हो गई। सुभान के घर की हालात भी कुछ ऐसी ही थी। इसी को देखते हुए सुभान ने चाय बेचने का फैसला किया। ANI न्यूज एजेंसी से बात करते हुए सुभान ने बताया कि जब वह छोटे थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। वह कहते है कि उनकी मां ने घर चलाने के लिए स्कूल बस अटेंडेंट का कार्य शुरू किया, पर लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हो गया और उनकी नौकरी चली गई। नौकरी जाने की वजह से इनके घर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। सुभान की बहने भी है। उन्होंने अपनी पढ़ाई और अपनी बहनों की पढ़ाई के बारे में कहा कि बहनें अपनी पढ़ाई ऑनलाईन कर रही हैं और मैं स्कूल खुलने के बाद पढूंगा।

सुभान ने अपनी घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने लिए चाय बेचने का विचार किया। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि “मैं भेंडी बाजार में चाय बनाता हूं और फिर नागपाडा, भेंडी बाजार और मुंबई के बाकी इलाकों में चाय बेचता हूं।” उन्होंने बताया कि मेरे पास कोई दुकान नहीं है। चाय बेचकर मैं दिन में लगभग 300-400 रू. तक कमा लेता हूं। उन्हीं पैसों में से कुछ अपने पास रख कर बाकी सब मां को देता हूं।

आज-कल सोशल मीडिया के जरिए सुभान जैसे लोगों तक मदद पहुंच रही है। सुभान एक ऐसा लड़का हैं, जो मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही अपने परिवार की जिम्मेदारी ली। सुभान का यह कार्य उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं, जो अपनी जिम्मेारियों से मुंह मोड़ लेते हैं।

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