Tuesday, June 22, 2021

पढ़ने के लिए रोज जाती थी 70 KM, आकांक्षा ने NEET एग्जाम में 720 में 720 नम्बर हासिल किया। पढ़िए इनकी संघर्ष भरी कहानी।

हर बच्चे का बड़े होकर कुछ बनने का सपना होता है। कोई इंजीनियर बनना चाहता है, तो कोई डॉक्टर ऐसे ही ना जाने कितने बच्चे अपने मन में हजारों सपने लेकर पढ़ाई करते हैं।प्रत्येक वर्ष लाखों बच्चे डॉक्टर बनने के ख्वाहिश लिए NEET की परीक्षा में शामिल होते हैं। सभी विद्यार्थियों का यहीं सपना होता हैं कि वे मेडिकल की पढ़ाई में उत्तीर्ण हो और अपना एक अलग पहचान बनाये। आज की हमारी कहानी भी ऐसी ही एक छात्रा की है जिसने सपना भी देखा और उसे पुरा भी की।

कौन है आकांक्षा सिंह

आकांक्षा सिंह जो उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में स्थित अभिनायकपुर गाँव की रहने वाली है। उन्होंने NEET की परीक्षा में 720 में से 720 नम्बर हासिल की। जब वह हाईस्कूल में थी तभी से NEET की तैयारी में लग गई। उन्होंने बताया कि वह NEET की तैयारी के लिए प्रत्येक दिन 70 किलोमीटर की दूरी तय कर गोरखपुर कोचिंग के लिए जाती थी। उसके बाद वह दिल्ली चली गई। वहाँ से उन्होंने 11वी. और 12वी. की पढ़ाई पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह NEET की तैयारी में लग गई।

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आकांक्षा सिंह की माँ एक शिक्षक हैं और उनके पिता भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड सार्जेंट है। वेलोग अपनी बेटी की कामयाबी से बहुत खुश हैं। कुछ दिन पहले ही आकांक्षा का रिजल्ट टप लिस्ट में आया। रिजल्ट आने के बाद इनके माता-पिता को ख़ुशी का ठिकाना ना रहा और वेलोग पूरे गाँव में लोगों को मिठाई खिलाकर अपनी ख़ुशी जाहिर की।

Akanksha neet topper photo

आकांक्षा के प्रेरणा का स्रोत बना दिल्ली का एम्स

आकांक्षा ने बताया कि जब वह 8वी. कक्षा में थी तब वह सिविल सर्विस में काम करने को सोचा था। पर उनके प्रेरणा का स्रोत बना दिल्ली का एम्स। उन्होंने बताया की जब वह 9वी. क्लास में थी तभी से एक डॉक्टर बनने का सपना देखने लगी और NEET की तैयारी में लग गई। आकांक्षा अपनी सफलता का श्रेय भगवान, माता-पिता और अपने इंस्टिट्यूट को देना चाहती है। वह 11वी. और 12वी. तक की पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की। उन्होंने बताया कि उन्हें गाना सुनना भी पसंद करती है।

आकांक्षा को दूसरा स्थान उनके कम उम्र की वजह से प्राप्त हुआ

आकांक्षा ने NEET के रिजल्ट में दूसरा स्थान प्राप्त किया। पहले स्थान पर शोयब है। आकांक्षा ने कहा कि उनके कम उम्र
की होने के वजह से दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। आकांक्षा और शोयब की उम्र में महज दो साल का फर्क था।

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आकांक्षा सिंह कहती है कि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि वह टॉप करेंगी। उन्होंने बताया कि वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम और लगन से मेहनत की और टॉप 40 में स्थान ला पाई। उनके लिए दूसरा रैक लाना बहुत बड़ी बात थी। वह कहती है कि मैं सभी NEET के छात्रों से कहना चाहती हूँ कि असफलता से घबराये नहीं और अपने लक्ष्य को हमेशा ध्यान में रखकर परिश्रम करें।

आकांक्षा सिंह ने 720 में से 720 अंक प्राप्त कर उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा बनी जो NEET की तैयारी करते है।

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