Tuesday, June 22, 2021

15 हज़ार ख़र्च और 1 लाख रुपये का फायदा, लौकी की खेती से इस किसान को हो रहा है अच्छा मुनाफ़ा: तरीका जानें

दुनियां में प्रत्येक व्यक्ति अलग- अलग कामो के लिए जाने जाते हैं। जैसे:- डॉक्टर, इंजिनियर, शिक्षक आदि। वैसे ही खेती भी एक कार्य हैं । खेती करने का भी एक अलग तरीका होता है, जैसे हर व्यक्ति एक डॉक्टर नहीं हो सकता वैसे ही खेती करने का भी तरीका पता होना चाहिए। खेती में भी कोई अनाज उगाता हैं, जैसे:- गेहूं, धान, मक्का आदि। वहीं कुछ लोग हरी सब्जियां उगाते हैं। आज- कल ज्यादातर लोग हरी सब्जियां उगा रहे हैं क्योंकि हरी सब्जियों की खेती में कम लागत में ज्यादा मुनाफा होता हैं।

आज की हमारी कहानी भी एक ऐसे ही किसान की है, जिन्होंने केवल 15 हजार रूपए की लागत में लौकी की खेती कर लाखों की कमाई कर रहे है। आइए जानते है की वह कैसे लौकी की खेती करते है और इसमें मुनाफा भी कमाते है।

एक किसान जिनका नाम है ” अंबिका प्रसाद रावत सिगहा”। वह खास तौर पर लौकी की खेती करते है। इनसे पहले बाराबंकी क्षेत्र के सभी किसान केवल मोटे अनाज की ही खेती करते थे ,जैसे:- धान, गेहूं आदि। वेलोग इन्हीं अनाजो को अपनी आमदनी का जरिया मानते थे, लेकिन इन खेती के अलावा भी हम लौकी , टमाटर और आलू जैसी हरी सब्जियों की खेती से भी अच्छी- खासी कमाई कर सकते है, और हरी सब्जियों की ही खेती करके अंबिका प्रसाद लाखों की कमाई कर रहे है। साथ ही अपने गांव के लोगों भी अपनी कार्य से प्रेरित कर रहे है।

अंबिका प्रसाद की खेती में उन्हें सफलता मिल रही है। जिला मुख्यालय से ३८ किलोमीटर दूर फतेहपुर और सूरतगंज के ब्लॉक के छोटे किसानों के लिए आलू और टमाटर जैसी सह फसल एक असरदार सिद्ध हो रही है। एक वर्ष में लौकी की फसल तीन बार उगाई जाती हैं। जनवरी (January) के मध्य जायद की बुआई, मध्य जून(June)से प्रथम जुलाई (July) तक खरीफ की और सितंबर(September) के अंत तथा अक्टूबर (October) के आरंभ में लौकी की खेती की जाती है।

अंबिका प्रसाद रावत ने बताया कि,जायद की अगेती बुआई के मध्य जनवरी में लौकी की नर्सरी की जाती है। फिर मिट्टी को भुरभुरी करके लगभग एक मीटर चौड़ी क्यारी बनाई जाती हैं। उसको सही तरीके से तैयार करने के लिए उसमे जैविक खाद्य मिलाया जाता है। लगभग 30 सेे 35 दिनों मे लौकी की नर्सरी तैयार हो जाती है।

अंबिका बताते है कि नर्सरी तैयार होने के बाद 10 फीट की दूरी पर पंक्तियां बनाई जाती और एक पौधे से दुसरे पाैधे की दूरी कम से कम एक फीट रखी जाती हैं। इसके बीच टमाटर की फसल को भी आसानी से उगाया जा सकता है। कम लागत में दोनों फसलों को उगाने के लिए लौकी के फसल के लिए झाड़ बनाकर उस पर फैला दिया जाता है।

रामचन्द्र मौर्य का कहना है कि कुछ किसान अक्टूबर के महीने में आलू की बुआई के लिए 8 लाइनों के बाद एक पंक्ति उन्नत प्रजाती के देशी लौकी की बूआई की जाती है।आलू की खुदाई जनवरी महीने के अंत की जाती है उसके बाद फ़रवरी महीने के अंत तक लौकी का उत्पाद शुरू हो जाती है। सह खेती भी किसानों को ख़ूब पसंद आ रही है।मिट्टी में ऊर्वरक शक्ति की बढ़ोतरी के लिए फसल समाप्त होने पर लौकी की लताओं को हल से जुताई करकें मिट्टी में मिला दिया जाता है।

शोभाराम मौर्य कस्बा बेल्हारा के किसान हैं। वह कहते है कि “एक एकर में लौकी की खेती करने में १५ से २० की लागत आती है। एक एकड़ में लगभग ७० से ९० क्विंटल
लौकी उत्पाद होता हैं। इसका मूल्य बाजार में भी अच्छा खासा मिल जाता है, इसमें ८० हजार से १लाख की आमदनी होने की संभावना रहती हैं। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि रबी के मौसम में लौकी की खेती जो सितम्बर और अक्टूबर में होती है। उसमे केवल हाइब्रिड बीज का इस्तेमाल किया जाता हैं, जिसमें ठंड के मौसम में भी उत्पादन अच्छा होता हैं।

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