Wednesday, April 21, 2021

इजरायल से सीखी खजूर की खेती, अब विदेशों में भी कर रहे हैं खजूर की सप्लाई: सीखें तरीका

जिंदगी में ऐसा बहुतों बार होता है कि हम बनना कुछ और चाहते हैं लेकिन बन कुछ और जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ गुजरात के रहने वाले ईश्वर पिंडोरिया के साथ। इनकी चाहत तो पायलट बनने की थी लेकिन वह खेती कर किसान बने। वह एक ऐसे सफल किसान हैं जिनकी मिसाल हर कोई अन्य किसानों को देता है। उनके खेतों के खजूर सिर्फ हमारे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बिकते हैं। आइए जानते हैं ईश्वर पिंडोरियों के बारे में…

ईश्वर पिंडोरिया (Ishawar Pindoria) गुजरात (Gujrat) के एक छोटे से गांव के हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा राजकोट (Rajkot) से सम्पन्न की है। उनकी ख़्वाहिश कमर्शियल पायलट बनने की थी जिसके प्रशिक्षण के लिए वह बड़ौदा गए। उनका सपना कुछ और था लेकिन भाग्य ने कुछ और हीं लिखा था। उनके जिम्मे अपने पिता का व्यापार आया। उन्होंने उसमें पूरी तरह जानकारी एकत्रित की और उसे ऐसी उपलब्धि पर ले गए कि लोग उनके पास उसके गुण और तकलीफ सीखने आने लगे। उनके खेतों में जो फल उगते हैं हमारे देश ही नहीं बल्कि विदेशों के लोग भी उसका स्वाद चखते हैं।

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खेती की शुरुआत

उन्होंने अपनी खेती की शुरुआत मात्र 40 एकड़ में की। उन्होंने अपने खेती के लिए इजरायल की पद्धति को अपनाया। उन्होंने यह निश्चय किया कि वह पारंपरिक खेती को नहीं अपनाएंगे और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती करेंगे। वे इसके बारे में अधिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए इजरायल गये। वहां जाकर उन्होंने अपने दोस्त के सहयोग से जितने भी बड़े-बड़े किसान खेती कर रहे थे उनसे जानकारी इकट्ठा की और उनकी खेती का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें यह जानकारी मिली कि हमारे देश में जो किसान फसल नहीं उगाते वह इजराएल के किसान खेती करते हैं और इससे अधिक उत्पादन भी करते हैं। उन्होंने यह पाया कि वहां के किसान रेत वाली मिट्टी में भी खजूर की खेती कर इससे अधिक उत्पादन कर रहे हैं। तब उन्होंने यह मन बनाया कि वह भी अपने गांव जाकर यही कार्य करेंगे इसलिए उन्होंने वहां से कुछ खजूर के पौधे खरीदे और अपने गांव में आकर इसकी खेती शुरू की।

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आधुनिक तकनीक का उपयोग

वह अपनी खेती के लिए ड्रिप-इरीगेशन सिंचाई का उपयोग करते हैं। वह खजूर हीं नहीं बल्कि आम और अनार को भी अपने खेतों में लगाए हैं। उन्होंने यह जानकारी दिया कि वह ड्रिप सिस्टम को अपनाकर सिंचाई करते हैं जिससे पानी की बहुत कम खपत होती है। साथ ही रेतीली मिट्टी में भी पानी बहुत आसानी से पहुंच जाता है। उनकी खेती को GAP भी प्राप्त है। वह अपनी खेती से अधिक मुनाफा कमा रहे हैं जिससे अन्य किसान भी उसे अपनाने में लगे हैं।

ब्रांड का नाम है “हेमकुंड फार्म फ्रेश”

उन्होंने कोल्ड स्टोरेज यूनिट भी खोली है। उनके खेतों में उत्पादित फल देश और विदेश में जाते हैं। “हेमकुंड फार्म फ्रेश” उनके ब्रांड का नाम है। वह जो अपने खेतों में फलों को लगाते हैं वह रेसिड्यू फ्री हैं। उनका यह मानना है कि अगर हम भारत के सभी किसान दृढ़ संकल्प कर लें कि हम इस खेती में बेहतर कर एक मिसाल कायम कर सकते हैं तो इस कार्य को करने से कोई नहीं रोक सकता। वह 2 वर्ष पूर्व आम भी उगाया करते थे जो लोगों को बहुत ही पसन्द थे। उन्होंने जो खजूर के पेड़ अपने खेतों में लगाए हैं उनमें से प्रति पौधे में 200 किलो फल मिलते हैं।

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उनके खजूर लगभग 80-100 रुपये प्रति किलोग्राम बिकते हैं। उनके खेतों में उगे 1 खजूर का वजन 23-26 किलोग्राम तक होता है।

वह अपने खेत मे अनार भी लगाए हुए हैं जो जल्द ही उन्हें फल देंगे। वह अपने खेतों में उर्वरक के लिए पेड़ों की पत्तियों, गोबर और घर के कचरे का इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं वह अन्य किसानों की भी मदद करते हैं।

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अगर आप ईश्वर से बात करना चाहते हैं तो उनके ईमेल आईडी पर संपर्क कर सकतें हैं। उनका ईमेल आईडी है। hemkund.horticulture@gmail.com

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