Tuesday, June 22, 2021

कर्ज़ लेकर पढ़ने गए, किसान के इस बेटे ने UPSC में लहराया परचम बन चुके हैं IAS अधिकारी

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सफलता पाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। परन्तु सफलता पाना इतना आसान नहीं होता। इसके लिए हमें कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। एक व्यक्ति जब कुछ करने को सोचता है, तो उसके साथ-साथ उनसे जुड़े हर व्यक्ति को उनसे बहुत उम्मीद होता हैं और जब वह सफल होता है,तब केवल उनका सपना ही सपना पूरा नहीं होता बल्कि सबकी उम्मीद की भी जीत होती हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही युवक की कहानी बताने जा रहे है, जिन्होंने UPSC की तैयारी के लिए कई संस्थानों में दाखिला लिया। पर उनका नामांकन ना हो सका। इन्हे ‘कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय’ द्वारा टवेंटी UPSC टॉपर्स का सम्मान देने के लिए बुलाया गया, तब उनके पास वहां जाने के लिए पैसे तक नहीं थे।

आइए जानते हैं, इनकी पूरी कहानी

गोपाल कृष्णा रोनांकी

आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) के श्रीककुलम जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले गोपाल कृष्णा रोनांकी (Gopal Krishna Ronanki) के पिता एक किसान है। एक जानकारी के मुताबिक इन्हें दिल्ली के समारोह में जाने के लिए,अपने पड़ोसी से ५० हजार का कर्ज लेना पड़ा। उसके बाद वह प्लेन का टिकट कराकर उस समारोह में शामिल हुए।

रोनांकी ने अपने मां–बाप का सपना पूरा किया

गोपाल कृष्णा के पिता का नाम रोनांकी अप्पा राव (Ronanki Appa Rav) है। ३० सालों से इनके माता–पिता ने जो सपने देखे थे, गोपाल ने पूरे देश में UPSC परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल कर अपने मां–बाप का सपना पूरा किए। वह अपने मेंस की परीक्षा में तेलुगू साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में रखा और टॉप भी किया। गोपाल अपने सपनों को पूरा किएऔर बहुत बड़ी सफलता हासिल की, लेकिन इस सफलता को पूरा करने में इन्हें बहुत से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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इन्होंने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से की

गोपाल की परिस्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता एक किसान थे और उनकी मां हमेशा बीमार रहती थी। गोपाल ने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल से की, लेकिन इनके पिता हमेशा से ही इन्हें अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ाना चाहते थे। इनके आर्थिक स्थिति सही नहीं होने की वजह से गोपाल को सरकारी स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ी। जब इन्होंने अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर ली, उसके बाद इन्होंने गांव के ही एक स्कूल पढ़ाने का काम शुरू किया। इसके साथ ही इन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए सिविल परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दिए। पर दोनों कार्य एक साथ करने में इनकी सिविल परीक्षा की तैयारी अच्छी नहीं हो पा रही थी, जिसके कारण उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने को सोचा। कहते है कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता हैं, और गोपाल ने यह कहावत सच कर दिखाया और अपनी मेहनत से सिविल परीक्षा में सफलता हासिल की।

एक मिडिल क्लास परिवार में जन्मे गोपाल कृष्णा रोनांकी
ने अपने मेहनत और लगन से अपने माता–पिता के सपनों को पूरा किए।

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