Wednesday, September 22, 2021

पति ने 200 रूपए में बेच दिया, फिर भी अपनी हिम्मत और मेहनत से बनी पंजाब की पहली महिला एम्बुलेंस ड्राइवर

आज हम सभी लोग आधुनिक युग में जी रहे हैं। जहां दुनियां चांद पर पहुंची ही नहीं है, बल्कि वहां लोग जीवन-यापन करने के बारे में भी सोच रहे हैं। पर कुछ चीजे ऐसी है,जो पहले से लेकर आज तक वैसी ही है, वह है महिलाओं पर अत्याचार। जी हां एक लड़की को शादी के पहले भी सोच समझ कर चलना पड़ता हैं मानो जैसे दुनिया के सारे नियम उन्हीं के लिए बनाया गया हो। एक लड़की की जब शादी होती हैं तब उनके भी कुछ सपने होते हैं, जिन्हें वह जीना चाहती हैं। सोचिए अगर किसी लड़की की शादी हो और उसके पति हीं उसपर अत्याचार करे, कुछ रूपयों के लिए उसे कही बेच दे, उस वक्त उस लड़की पर क्या बीती होगी, इसे हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। आज की हमारी कहानी एक ऐसी ही महिला की है। जिनका नाम मनजीत कौर है, जिन्हें उनके पति ने 200 रूपए में बेच दिया, फिर वह हार नहीं मानी और बन गई पंजाब की पहली महिला एम्बुलेंस ड्राइवर।

मनजीत ने अपनी एक अलग पहचान बनाई

हमारे समाज में शुरू से ही महिलाओं और पुरुषों के बीच काम को लेकर भेदभाव चलते आ रहा हैं। पर इस बात को गलत साबित किया एक महिला एंबुलेंस ड्राइवर मनजीत कौर जिन्होंने अपने पति के खिलाफ जाकर समाज में अपना एक अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं,मनजीत की संघर्ष भरी कहानी।

मात्र 15 वर्ष की उम्र में हुई शादी

मात्र 15 वर्ष की उम्र में ही मनजीत कौर की शादी हो गई।
हर लड़की को यह उम्मीद होता हैं कि उनकी शादीशुदा जीवन में ढेर सारी खुशियां मिले और उनका जीवन साथी उनके हर कदम पर उनका साथ दे। लेकिन मनजीत के साथ बहुत बुरा हुआ। उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत मुश्किलों भरा रहा। मनजीत का पति एक शराबी था। वह पीने के लिए प्रत्येक दिन घर की कोई ना कोई वस्तु बेच देता था।

200 रूपयों के लिए मनजीत को बेचा

कहते है,एक शराबी किसी का नहीं हो सकता। मनजीत के पति ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए घर का सामान तो बेचता ही था। पर एक दिन तो हद हो गई जब उसने अपनी पत्नी मनजीत को भी 200 रुपए में बेच दिया। इस बात की जानकारी जब मनजीत को हुआ, तब उन्होंने अपने छत से कूदकर दूसरो के घर चली गई और जैसे – तैसे अपने आप को बचाया।

अपनी खुद की बेटी को ही मार दिया

मनजीत को दो बेटी भी थी। उनके पति ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। अपनी डेढ़ महीने की बेटी को उसने जमीन पर पटक कर मार डाला था। मनजीत जब फिर से गर्भवती हुई तब उसने अपनी सात महीने की बेटी को गर्भ में ही मार डाला।इसके बाद सन 1996 में मनजीत को एक बेटा हुआ।
 
बेटे का पालन-पोषण करने के लिए सीखी एम्बुलेंस चलना

मनजीत कौर का कहना है कि वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी। इस कारण उन्हें घर के कामों के अलावा बाकी कोई काम नहीं आता था। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं, कहां जाऊं। परिस्थिती भी ऐसी थी कि मुझे कुछ तो करना ही था और मैंने एंबुलेंस चलाना सीखा।

परिवार का भी साथ छूटा

मनजीत का कहना है कि उनके मायके से तो पहले ही रिश्ता खत्म हो चुकी थी। पर मेरे एक मुंहबोले भाई ने मेरी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। फिर धीरे-धीरे मैंने एम्बुलेंस चलाना सीखा। दिन में अपना काम कर रात को कार चलाना भी सीखती। उसके बाद मैंने कुछ पैसे जोड़ कर कूड़े में पड़ी एक वैन खरीदी और उसे ठीक करवाके उसके साथ काम करना शुरु किया। कुछ दिनों बाद मैंने अपना एंबुलेंस चलाना शुरू किया। किसी कारण से मुझे वह एंबुलेंस बेचना पड़ा। उसके बाद अभी मैं जोहल अस्पताल में एम्बुलेंस चलाती हूं। भले ही मनजीत पढ़ी – लिखी नहीं है पर वह साइन बोर्ड से हर रास्ते को याद रखती है।

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मनजीत को लोगों ने दिया सम्मान

मनजीत कौर का कहना है कि जब से वह एंबुलेंस चला रही है,उसके बाद इस काम के लिए लोगों ने उन्हें काफी सम्मान दिया। मनजीत कौर पिछले 14 वर्षों से एंबुलेंस चला रही हैं। अपनी एंबुलेंस में मरीज और डेड बॉडी को छोड़ने के लिए वह
यूपी,बंगाल,मुंबई, कोलकाता आदि राज्यों का सफर कर चुकीं हैं। एंबुलेंस चलाना ना केवल उनका शौक था,बल्कि इनकी मज़बूरी भी बन गई।

मनजीत कौर विपरीत
परिस्थितियों में भी अपने हौसलों को बनाएं रखी और उससे निकलने की कोशिश की। मनजीत ऐसी कई महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों से घबराकर हार मान लेती हैं। मनजीत कौर के इस ज्जबे को हम तहे दिल से सलाम करते हैं।

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