Thursday, July 29, 2021

व्यवस्थाओं से परेशान होकर MBBS डॉक्टर ने ठुकराई 5 लाख की नौकरी, आज बन चुके है IAS अफसर

नौकरी, जिसे पाने के लिए हमें ना जाने कितने संघर्ष करने पड़ते हैं। हम सब जानते हैं कि एक डॉक्टर बनने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है। अगर कोई आपसे बोले की एक एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर ने अपनी लाखों रुपए की नौकरी छोड़ आईएएस (IAS) बनने का फैसला किया।तो इस बात पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन आज की हमारी कहानी एक ऐसे ही डाॅक्टर की है जिन्होंने अपनी लाखों की कमाई छोड़ आईएएस (IAS) बनने का फ़ैसला लिया।

आइए जानते हैं, आखिर क्यों इन्होंने एक डाॅक्टर से IAS बनने का फैसला लिया

डॉ.धीरज जिन्होंने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए डाॅक्टर की नौकरी छोड़ आईएएस (IAS) बनने को सोचा। धीरज के साथ कुछ ऐसी घटना घटी की उन्हें सरकारी व्यवस्था के प्रति खीज उत्पन्न होने लगी। उसी दिन उन्होंने प्रण लिया कि वह सिस्टम का हिस्सा बनकर इसे बदलेंगे।

धीरज ने पहले प्रयास में ही कैसे पाई सफलता

साल 2019 में धीरज ने यूपीएससी की परीक्षा दी, जिसका परिणाम अगस्त 2020 में आया। उन्होंने पहली प्रयास में ही 64वीं रेंक के साथ पास किए। धीरज उत्तरप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में पले-बढ़े और वह मिडिल क्लास परिवार से नाता रखते है। 12 वीं तक की पढ़ाई उन्होंने अपने गांव के ही हिन्दी मीडियम स्कूल से की। उन्होंने 12 वीं की पढ़ाई करने के बाद बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी से एमबीबीएस (MBBS) और एमडी (MD) किए। शुरू से ही धीरज पढ़ने में काफ़ी अच्छे थे। इसका प्रमाण उन्होंने एमबीबीएस और एमडी करके दी। उन्होंने यह दोनों एंट्रेस ना केवल पूरी ही की बल्कि अच्छे से डिग्री भी पूरी की।

पढ़ाई में समय लगाने के बाद अब वह मेडिकल ट्रीटमेंट में काबिल हो गए थे। उनकी मां की तबीयत अक्सर ख़राब रहती थी और उनके पिता दूसरे शहर में नौकरी करते थे। मां के अकेले होने के कारण धीरज को हमेशा बनारस से गांव का सफर तय करना पड़ता था। जिसके कारण उन्हें कई बार तो हर सप्ताह घर आना पड़ता था। धीरज को हमेशा एक जगह नहीं रहने के कारण उनके पढ़ाई काफ़ी प्रभावित होती थी। फिर एक दिन उन्होंने सोचा की अगर वह बड़े अफसरों से बोल कर अपने पिता का ट्रांसफ़र अपने ही शहर में करवा ले तो उनके लिए काफ़ी अच्छा रहेगा। पर जब उन्होंने उन अधिकारियों से बात की तब वेलोग काम करने के बजाए उनके साथ बहुत ही बुरे तरीके से पेश आए। उनके साथ बुरा हुआ, इसलिए उन्होंने सोचा की जब एक पढ़े लिखे डॉक्टर के साथ ऐसा हो सकता है,तो एक आम व्यक्ति की क्या हालत होती होगी और उनके मन में यह बात घर कर गई थी इस कारण उन्होंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई छोड़ सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने और आईएएस (IAS) बनने को सोचा।

धीरज के इस फैसले से उनके परिवार से लेकर दोस्त तक सभी अचंभित हो गए। सभी लोगो ने उन्हें काफ़ी समझाया की अपनी अच्छी खासी करियर छोड़ सिविल परीक्षा की तैयारी करना ठीक नहीं है। फिर धीरज ने कहा कि अगर वह पहली प्रयास में ही यूपीएससी पास नहीं कर पाए, तो फिर वह मेडिकल फिल्ड में ही काम करेंगे।

धीरज अपने गांव से ही पढ़ाई कर एक डॉक्टर बने। डाॅक्टर बनने के बाद उन्होंने सिस्टम से परेशान होकर UPSC की तैयारी करने को सोचा। धीरज अपनी मेहनत और लगन से अपने प्रयास में सफल हुए और परीक्षा में 64वें रैंक लाकर सफलता हासिल किए। आज उनके सफल होने से उनके माता पिता और दोस्त सभी को उनकर गर्व हैं।

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