Wednesday, April 21, 2021

TCS की नौकरी छोड़ गीतांजलि नई शुरू किया आर्गेनिक सब्जियों का बिजनेस, सालाना कमा रही 20 करोड़। जाने तरीका

हमारे देश में जैविक खेती का प्रचलन काफी बढ़ रहा है। जैविक खेती से उगाए जाने वाले फल और सब्जी हमारे स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद होती है। कुछ लोग अपने शोध से नए- नए तरीके अपनाकर जैविक खेती कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं गीतांजलि राजमणि। जिन्होंने दो दोस्तों के साथ मिलकर जैविक खेती करनी शुरू की थी। और आज इन्होंने इस जैविक खेती से करोड़ों रुपए की कमाई कर रहे हैं।

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जानिए कौन है गीतांजलि

गीतांजलि राजमणि का जन्म हैदराबाद में हुआ था। लेकिन इनका पैतृक घर केरल में था। गीतांजलि अक्सर गर्मियों की छुट्टी में अपने घर केरल जाते थे। इन्होंने अपना आधा बचपन केरल के इन्हीं खेतों और पहाड़ियों में घुमते हुए बिताया था। गीतांजलि ने पौधों के बारे में जानना यहीं से शुरू कर दिया था। गीतांजलि जब दो साल की थीं तब इनके पिता को सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। तब गीतांजलि को उनकी मां और बड़े भाई ने परवरिश कि। गीतांजलि ने साल 2001 में उस्मानिया कॉलेज फॉर विमन हैदराबाद से बीएससी किया। फिर इसके बाद साल 2004 में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पांडिचेरी से इंटरनेशनल बिजनेस से एमबीए किया। इसके बाद गीतांजलि ने 12 सालों तक क्लीनिकल रिसर्च इंडस्ट्री में काम किया।

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TCS कंपनी में करती थी काम

गीतांजलि ने टीसीएस कंपनी में बतौर ग्लोबल बिजनेस रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में काम किया। यहां गीतांजलि ने प्रमुख फार्मा कंपनी का बड़े पैमाने पर हो रहे संचालन का प्रबंधन कर रही थी। इसके बाद इन्होंने साल 2014 में टीसीएस की नौकरी छोड़ दी। इस कंपनी में गीतांजलि काफी कुछ चीजें जैसे लाभ- हानि, सेल्स, हायरिंग, संचालन आदि सीखी। टीसीएस छोड़ने के बाद गीतांजलि ने अपने जिंदगी में कुछ अलग करने के बारे में सोचा। गीतांजलि को जैविक खेती और गार्डेनिंग करने में काफी रुचि थी। इसके बाद इन्होंने जैविक खेती करना शुरू कर दिया। गीतांजलि को इनके पति और इनके घर वालों ने इस बिजनेस में काफी सपोर्ट की और मदद भी किया।

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किसान और उपभोक्ता की मदद की दृष्टिकोण से शुरू की जैविक खेती का बिजनेस

गीतांजलि बताती हैं कि आजकल लोगों के भोजन करने का तरीका काफी बदल रहा है। जैविक के नाम पर खाने वाली ज्यादातर चीजें हमारे स्वास्थ के लिए हानिकारक होती है। बाजारों में जैविक के नाम पर सब्जियां बेची जाती है। लेकिन इसमें ज्यादातर सब्जियां जैविक नहीं होती है। और लोग इसे जैविक समझकर खा लेते हैं। ज्यादातर लोगों को पता है कि ऐसे सब्जियां खाने से कैंसर की बीमारियां होती है। गीतांजलि ने साल 2017 में दो को- फाउंडर्स शमीक चक्रवर्ती (सीईओ) और सुदाकरण बालसुब्रमण्यम(सीटीओ) के साथ मिलकर बतौर सीओओ फर्मिजन की शुरुआत की थी। गीतांजलि बताती हैं कि जब मैंने खुद के उपयोग के लिए जैविक सब्जियों के तरीके का प्रयोग कर रही थी। तो मुझे ख्याल आया कि यह जैविक बिजनेस मॉडल काफी लोगों को पसंद आएगा और किसान और उपभोक्ता दोनों ही मदद करेंगे।

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बेंगलुरु, हैदराबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों में 46 एकड़ में जैविक खेती का काम कर रही हैं।

गीतांजलि साल 2017 में पहला खेती करने के बाद अब उन्होंने बेंगलुरु, हैदराबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों में 46 एकड़ में जैविक खेती काम कर रहे हैं। साल 2017 के सितम्बर में वीसी फंड वेंचर हाईवे और चार एंजेल इन्वेस्टर से 34.50 लाख रुपए की फंडिंग मिली थी। वॉट्सएप की कोर टीम के मेंबर रहे नीरज अरोरा भी इस एंजेल इन्वेस्टर में शामिल हैं।

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किसानो को खेती के गुण सिखाती है गीतांजलि

गीतांजलि अन्य किसानों को सलाह देते हुए बताते हैं कि वे जैविक और प्राकृतिक खेती के तरीकों पर शोध कर के खेती करें और और अपने देश की मिट्टी को रसायन से बचाएं। ये बताती हैं कि हमारे देश की मिट्टी दुनियां के बेहतरीन मिट्टियों में से एक है। लेकिन दुर्भाग्यवश यह रासायनिक खद्धों से बिगड़ती जा रही है। गीतांजलि बताती हैं कि हमें अपनी मिट्टी को पुर्नजीवित करने की जरूरत है। अगर मिट्टी समृद्ध, उपजाऊ और जीवन से भरपूर होगी तो उसमे उगने वाली फसलें भी सवस्थ और कीटों से मुक्त होगी। उसमे जैविक कार्बन, पोषक तत्व, रोगाणु आदि भरने की जरूरत है। जिससे उसके स्वास्थ को बेहतर बना सके। गीतांजलि का मानना है कि किसानों को जैविक खेती करने के बेहतर तकनीक जैसे कम्पेनियन प्लांटिंग, मल्टी कॉप्रिंग, क्रॉप रोटेशन आदि है। जो मिट्टी के अनुकूल है।

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जैविक खेती से सलाना 20 करोड़ रुपए का टर्न- ओवर कर रही हैं।

गीतांजलि ने जनवरी 2017 में इस फार्मिजन की शुरुआत की थी। आज 16000 से ज्यादा ग्राहक इसे पसंद करते हैं। गीतांजलि ने आज इस जैविक खेती से सलाना 20 करोड़ रुपए का टर्न- ओवर कर रही हैं। यह लॉकडाउन में भी काफी तेजी से बढ़ी है। गीतांजलि बताती हैं कि इस आपदा से आज लोग को महसूस हुआ कि जैविक और प्राकृतिक खेती को खोने की कीमत क्या होती है। गीतांजलि ने एक ऐप भी बनाया है। इस ऐप के माध्यम से लोगों को होने डिलीवरी भी उपलब्ध कराते हैं। और लोगों को गीतांजलि पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। गीतांजलि राजमणि ने अपने सपनों को पुरा करने के लिए रिस्क लिया। और अपनी मेहनत और लग्न से इस काम को कर सफलता हासिल की।

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