Friday, September 24, 2021

पिता करते थे अफसरों को सलाम, बेटी प्राइमरी स्कूल टीचर से बनी IAS अफसर, परिवार की बदल दी जिंदगी

सपना जिसे देखने का और उस सपने को पूरा करने का हक सबका है चाहे वह व्यक्ति अमीर हो या गरीब। अक्सर हम यह सुनते हैं कि इंसान को अपनी हैसियत के हिसाब से सपने देखने चाहिए, लेकिन एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाली एक लड़की ने यूपीएससी (UPSC) पास कर आईएएस (IAS) अफ़सर बनने का सपना देखा और उसे पूरा भी किया। जी हां आज की हमारी कहानी उत्तरप्रदेश की रहने वाली फातिमा सीरत की है, जिन्होंने एक प्राइमरी टीचर से सीधा UPSC की परीक्षा दी और पास भी हुई।

फातिमा के पिता लेखपाल जब भी अपनी महकमें में कोई बड़े अफसरों को काम करते हुए दिखते थे , तब वह अपनी भी बेटी के बारे में सोचने लगते कि काश वह भी इन अफसरों की तरह किसी बड़े पद पर होती। उन्होंने अपनी बेटी को लेकर जो सपना देखा था, वह फातिमा ने बहुत जल्द ही पूरी कर दी और आज वह इंडियन एंड ट्रैफिक सर्विस में कार्यरत है। 2007 में फातिमा ने परीक्षा पास कर ऑल इंडिया 810वीं रेंक हासिल की थी।

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प्रयागराज गांव के जरसा की रहने वाली फातिमा ने घर से लगभग 36 किमी. दूर रोज अपने सकूल पढ़ाने के लिए जाया करती थी। उनके चार भाई-बहन हैं, जिनमें वह सबसे बड़ी है। सारे भाई-बहनों में बड़े होने के कारण उनसे ज्यादा उम्मीद भी थी। इनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इनके पिता ने जैसे-तैसे अपनी परिवार का खर्च चलाते थे। फातिमा का बचपन से ही एक बड़ा अफ़सर बनने का सपना था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से उनका सपना जल्दी पूरा ना हो सका। उन्होंने 12वीं पास होने के बाद बीएससी की। फातिमा ने बीएड की भी डिग्री ली और फिर वह प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने के लिए चुनी गई। उन्होंने अपनी नौकरी के बारे में बताया कि अगर मैं नौकरी नहीं करती तो मेरे भाई-बहन की पढ़ाई-लिखाई में दिक्कत आती। उन्होंने प्राइमरी टीचर की नौकरी के बावजूद भी अपने सपनों को नहीं भूली थी।

विद्यालय में बच्चो को पढ़ाने के साथ – साथ यूपीएससी (UPSC) की तैयारियां भी शुरू कर दी। फातिमा जब भी अपने यूपीएससी की तैयारी के बारे में अपने स्कूल के दोस्तों से बताती थी, तो वह कहती थी कि इतने बड़े सपने देखना छोड़ दो क्योंकि इसके लिए कोचिंग करनी पड़ती है। फातिमा के लिए दिल्ली जाकर कोचिंग क्लास करना संभव नहीं था, क्योंकि उनके लिए उनकी नौकरी भी जरूरी थी। फातिमा ने अपनी पूरी तैयारी नौकरी के साथ ही की। इतना ही नहीं वह कही पर कोई भी कोचिंग ज्वाइन नहीं की। वह रोज 36 किमी का सफर तय करके पढ़ाने के लिए जाया करती थी और दिन भर की थकान के बावजूद यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर पाना आसान नहीं था, लेकिन वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत करती थी। फातिमा ने अपने टीचर ट्रेनिग के दौरान ही दो बार प्रयास कर चुकी थी और तीसरा प्रयास उन्होंने अपनी तैयारी के साथ की पर उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। पर फातिमा इससे निराश नहीं हुई और फिर एक साल बाद परीक्षा में बैठी और इस बार वह सफल रही।

आज फातिमा की शादी भी हो चुकी है। फातिमा ने अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया। जब वह अपने सपनों को पूरा कर ली तब उन्होंने अपने स्कूल के बच्चो को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की। फातिमा अभी भी अपनी रेंक सुधारने और ऊंचा पद हासिल करने के लिए तैयारियों में लगी हुई है।

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