Wednesday, April 21, 2021

भारत के प्राइमरी स्कूल टीचर ने जीता 7 करोड़ रुपये का अंतर्राष्ट्रीय इनाम, इनाम के 7 करोड़ का आधा हिस्सा किया दान

हमारे जीवन में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। एक शिक्षक ही है जो हमे हमेशा सही रास्ते पर चलना सिखाते है तथा सही और गलत में फर्क करने का ज्ञान भी देते हैं। बिना गुरू के ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती है। यदि छात्र अपने मार्ग से भटक जाता है तो एक गुरू ही उसे वापस सही राह पर लाता है। बच्चों का वर्तामान तथा भविष्य एक गुरू ही संवारता है।

आज हम आपको एक ऐसे ही शिक्षक के बारे में बताने जा रहे है जिसने ग्लोबल टीचर प्राइज (Global Teacher Prize) जीता है। इतना हीं नहीं इस शिक्षक ने इनाम के 7 करोड़ 38 लाख रुपये के आधे हिस्से का दान भी किया है।

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आइये जानते हैं, उस शिक्षक के बारे में जिसने ये खिताब अपने नाम कर के बहुत सुन्दर मिसाल पेश किया है।

रंजीत सिंह दिसाले (Ranjit Singh Disale) महाराष्ट्र (Maharashtra) के सोलापुर जिले के पारितेवादी गांव के रहने वाले हैं। इनकी उम्र 32 वर्ष है। रंजीत सिंह दिसाले वर्ष 2009 में प्राईमरी स्कूल पहुंचे थे, जिसकी हालत खस्ता थी। उस विद्यालय की इमारत टूटी पड़ी थी तथा स्कूल का हाल बेहाल था। वहां के लोग अपनी लडकियों को शिक्षा दिलाने में रुचि नहीं रखते थे। उनका मानना था कि कोई भी बदलाव कुछ परिवर्तन नहीं कर सकता है, जो जैसा है, वैसा ही रहेगा। ऐसे में कोरो’ना की वजह से बच्चों की शिक्षा पर काफी प्रभाव पड़ा है। स्कूलो में डिजिटल लर्निंग की सहायता से घर बैठे कोई भी बच्चा क्लास ले सकेगा परंतु लड़कियां फिर भी इसमे पीछे रही है। उनके हाथ में मोबाइल कम ही आता है।

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दिसाले ने इसे बदलने का जिम्मा लिया। इन्होंने लड़कियों की पढ़ाई में अहम योगदान दिया है। रंजीत सिंह ने घर-घर जाकर बच्चों के माता-पिता को बच्चों की पढाई के लिये मनाया। पेरेंट्स को शिक्षा के लिये मनाना बहुत कठिन कार्य था। किताबे अंग्रेजी भाषा मे होने की वजह से यह भी एक परेशानी थी। इस समस्या से निपटने के लिये रंजीत सिंह ने सभी किताबों का हिंदी में अनुवाद किया तथा उसमें तकनीक को जोड़ा।

इसके साथ ही रंजीत सिंह ने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया कि बच्चे ज़्यादा से ज़्यादा चीज़े सीख सकें। इसकी वजह से बच्चे वीडियो लेक्चर को अटेंड कर सके तथा अपनी ही भाषा में कहानी और कविताएं सुन सके। उसके बाद गांव में तथा आसपास के क्षेत्रों में बाल विवाह जैसे अपराधों में तेजी से गिरावट हुईं।

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रंजीत सिंह ने महाराष्ट्र के किताबों में क्युआर कोड की पहल की थी। वर्ष 2017 में रंजीत सिंह ने ही महाराष्ट्र सरकार को सभी सिलेबस को क्युआर कोड (QR Code) से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। उनके प्रस्ताव को सुनते ही महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा किया कि वह सभी श्रेणियों के लिए राज्य में क्यूआर कोड पाठ्य पुस्तकें आरंभ करेंगी। उसके बाद एनसीईआरटी (NCERT) ने भी इस बात पर अपनी स्वीकृति जताते हुए घोषणा कर दी है।

क्युआर कोड (QR Code) क्या होता है?

क्यूआर कोड का फुल फॉर्म होता है क्विक रिस्पांस कोड। इसे बारकोड भी कहा जाता है। इसमें हजारों जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। यह स्कैन करने का कार्य करता है तथा यह एक स्क्वायर आकार का कोड होता है, जिसमे सभी जानकारियां संरक्षित रहती है। किताब, अखबार या कोई बेवसाइट हो सबका एक QR कोड होता है।

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प्राइमरी स्कूल के शिक्षक रंजीत दिसाले को अद्भुत शिक्षक का अवार्ड मिला है। रके फाउंडेशन ने असामान्य शिक्षक को उनके श्रेष्ठ योगदान के लिये पुरस्कृत करने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में इस पुरस्कार को आरंभ किया था। इसके लिए इस वर्ष विश्व भर से 12 हजार शिक्षकों की एंट्री आई। दिसाले ने इनाम की रकम प्राप्त होते ही आधी राशि को शिक्षकों में बांटने का ऐलान किया। रंजीत सिंह दिसाले का मानना है कि शिक्षक हमेशा देने और बांटने में यकीन रखते हैं।

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