Friday, July 30, 2021

गाजियाबाद की यह टीचर जो पोधों की बागवानी लगाकर, उनके द्वारा बच्चों को हिंदी व्याकरण और विज्ञानं पढ़ती हैं

पर्यावरण संकट से हमारा पूरा देश जूझ रहा है। पूरे विश्व के लिए यह एक महामारी से कम नहीं है। वातावरण में प्रदूषण फैलने के कारण रोज ना जाने कितने लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती हैं। प्रदूषण फैलने का मुख्य कारण है, पेड़ – पौधों की कटाई। ऐसे में हम सबको मिलकर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना चाहिए, क्योंकि यह हमारा दायित्व ही नहीं बल्कि हमारी जरूरत भी है। आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे है, जिन्होंने अपने पूरे छत को पेड़-पौधों से भर दिया है। इनके इस कोशिश से वातावरण को शुद्ध करने के साथ ही साथ बच्चो को इन पौधों के माध्यम से हिंदी व्याकरण और विज्ञान जैसी कठिन विषय की जानकारी भी देती हैं।

इस महिला का नाम संगीता श्रीवास्तव है, जो उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद जिला के इंदिरापुरम इलाके के रहने की रहने वाली है। वह पेशे से एक प्राइवेट स्कूल की टीचर है। संगीता पिछले छः वर्षों से अपने छत पर ही 100 से ज्यादा पौधे लगा चुकी है। इतना ही नहीं वह इन पौधों के माध्यम से यूट्यूब (YouTube) विडियो बनाकर बच्चों को प्रकृति के प्रति जागरूक करती है और हिंदी व्याकरण और विज्ञान के बारे में बताती है।

संगीता बताती है, की “मुझे बचपन से ही बागवानी का काफ़ी शौक रहा है और एक बार घर की जिममेदारियां थोड़ी कम होने के बाद, करीब छः वर्ष पहले मैंने अपनी छत पर ही बागवानी शुरू कर दी। शुरूआत में मेरे पास लगभग 10 पौधे थे, लेकिन आज मेरे पास 100 से ज्यादा सजावटी,फलदार और औषधीय पौधे होने के साथ साथ कई सब्जियां भी है।”

अपको बता दें कि संगीता के बागीचे में फलदार पौधों में आम,अनार, कीवि आदि हैं। औषधीय पौधों में एलोवेरा,गिलोय,तुलसी,नीम,अपराजिता आदि हैं और सब्जियों में पालक, भिंडी, बैंगन, लौकी, आदि हैं। इस तरह उन्होंने अपनी बागवानी लगाई है कि उन्हें बाजार से बहुत कम कुछ भी खरीदना पड़ता हैं।

संगीता कहती है, “मेरे पास पुराने बाल्टी, बर्तन और डिब्बे से लेकर कपड़े, चावल-आटे के बैग हैं जिसमें मैं पौधे लगाती हूं। मैं अपने सकूल के बच्चो को भी इस तरह से वेस्ट मैटेरियल के जरिए बागवानी करने की सीख देती हूं। यही कारण है कि आज हमारे स्कूल के चारों तरफ पौधे ही पौधे लगे हुए नजर आते हैं।”

कैसे लगाते है बागवानी

संगीता ने बताया कि “मैं अपने पौधों के लिए मिट्टी का निर्माण 50 फीसदी मिट्टी ,25 फीसदी जैविक खाद, 25 फीसदी वर्मी कम्पोस्ट और हल्की मात्रा में एनपीके मिलाकर करती हूं।”

उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि “मैं गोबर की पूर्ति करने के लिए बाहर से उपले मंगाती हूं और दो दिनों तक उसे पानी में भिगोकर उसमे थोड़ा एनपीके मिलाकर, उसे खाद के रूप में इस्तेमाल करती हूं। इसके अलावा हमारे घर में जितना किचन वेस्ट समाग्री होता है, मैं सबका उपयोग जैविक खाद के रूप में करती हूं।”

संगीता ने अपने पौधों को जरूरत के हिसाब से धूप लगने के लिए अपने छत पर नेट भी लगाया है। वह अपने पौधों की सिंचाई आर/ओ वाटर फिल्टर (RO water filter) के बेकार पानी से करती है, ताकि पानी की भी बचत हो। इन सभी कार्यों में उनके पति उनका पूरा साथ देते है।

बच्चो को प्रकृति से रूबरु करवाने के लिए किया अनूठा प्रयास

बच्चो को बागवानी के माध्यम से शिक्षा देने के लिए चार साल पहले ही संगीता ने एक यूट्यूब( YouTube) चैनल बनाया।

YouTube चैनल शुरू करने को लेकर संगीता कहती है कि उन्होंने यूट्यूब चैनल शुरू की, लेकिन समय की कमी के कारण वह इसमें ज्यादा समय नहीं दे पाती थी। पर उन्होंने बताया कि lockdown के बाद से वह प्रत्येक रविवार को एक वीडियो शेयर करती ,जिसे हर महीने 500 से लेकर 1000 बच्चे देखते हैं।

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उन्होंने आगे बताया कि ” मेरा उद्देश्य बच्चो को प्रकृति से जोड़ना है। मैं बच्चों को पेड़ – पौधों के जरिए हिंदी व्याकरण और विज्ञान की जानकारी देती हूं। जैसे:- यदि मुझे जतिवाचक संज्ञा के बारे में बताना हो तो मैं उनसे कहती हूं-
यह आम का पेड़ है। जबकि यदि मुझे व्यक्तिवाचक संज्ञा के बारे में बताना हो तो, मै उन्हें बताती हूं कि – यह एक दशहरी आम का पेड़ है।”

उनका कहना है कि आज के समय में पर्यावरण संबंधित चुनौतियों को देखते हुए बच्चो को बागवानी से जोड़ना जरूरी है। यदि बच्चे प्रेरित हो गए तो समाज भी स्वभाविक रूप से बदल जाएगा।

इसके अलावा वह सभी से अपील भी करती हैं कि आज जिंदगी बेहद तनावपूर्ण है, ऐसी स्थिति में जितना संभव हो सके ,हर किसी को बागवानी शुरू करनी चाहिए इससे खुद को तनाव रहित रखने में काफी मदद मिलती है।

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