Tuesday, July 27, 2021

प्रबल इच्छाशक्ति के दम पर अपने विकलांगता को भी पीछे छोरा, एक फोटोकॉपी की दुकान से शुरू कर 1000 करोड़ का बिज़नेस खड़ा किये

अक्सर हम यह देखते हैं कि यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से अपंग हो या उसके हाथ पैर सही से काम ना करता हो तो वह लोगो के लिए बोझ बन कर रह जाते हैं। पर यह केवल लोगो की सोच हैं और इसी सोच को ना जाने कितने ही अपंग व्यक्तियों ने गलत साबित कर के दिखाया है। आज हम एक ऐसे ही शख़्स की कहानी लेकर आए है, जो शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद भी एक छोटे से फोटोकॉपी की दुकान से शुरूआत कर 1000 करोड़ की कम्पनी खड़ा कर दिया।

आइए जानते है, इनकी सफलता की कहानी-

रामचन्द्र अग्रवाल जिनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ।
रामचंद्र बचपन में पोलियों की बीमारी से ग्रस्त हो गए, जिसके कारण वह चल फिर नहीं सकते थे। उनका जीवन बहुत ही कठिन हो गया था। उनका मात्र एक ही सहारा था, उनका बैसाखी जिसके सहारे उन्होंने अपना जीवन गुजारा। जैसे-तैसे उन्होंने अपना ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद साल 1986 में उन्होंने कर्ज लेकर एक फोटोकॉपी की दुकान खोली।

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रामचन्द्र ने लगभग एक साल तक दुकान चलाई। उसके बाद उन्होंने खुदरा कारोबार शुरू करने को सोचा। कोलकाता के लाल बाजार में एक कपड़ा की दुकान खोली।कई सालों तक उन्होनें दुकान चलाई। दुकान चलाने के बाद उन्हें इस कारोबार में बड़ा मुनाफा दिखा। इन्होंने लगभग 15 वर्षों तक दुकान चलाई और फिर इसे बंद कर बड़े स्तर पर एक खुदरा व्यापार शुरू करने का निर्णय लिया।

साल 2001 में रामचन्द्र ने कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट हो गए। दिल्ली में इन्होंने ‘विशाल रिटेल’ के नाम से एक खुदरा व्यापार आरम्भ की। एक छोटे से आउटलेट से शुरू होकर विशाल लगातार बढ़ते गया। पहली बार साल 2002 में “विशाल मेगामार्ट” के रूप में शुरूआत करते हुए कम्पनी के आस-पास के क्षेत्रों में अपनी पैठ जमानी शुरू कर दी।

रामचन्द्र का कारोबार दिन पर दिन बढ़ते गया और कई शहरों तक फ़ैल गया। वर्ष 2007 में उनकी कम्पनी ने 2000 करोड़ का शुरुआती सार्वजनिक प्रस्ताव निकाला।
धीरे-धीरे वह सफलता के ऊंचाइयों को छूने लगे। उन्होंने 2007 में शेयर बाजार में तेजी के दौरान विशाल रिटेल की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में बैंक से उधार लेकर आउटलेट्स में सुविधाओं पर जोर दिया।

साल 2008 उनके लिए बेहद ख़राब रहा। शेयर बाजार में में आई भारी गिरावट की वजह से विशाल रिटेल को 750 करोड़ का नुकसान हुआ। उधार चुकाने के लिए उन्हें विशाल रिटेल को बेचना पड़ा। बहुत जद्दोजहद के बाद साल 2011 में विशाल रिटेल का सौदा श्रीराम ग्रुप के हाथो तय हुआ।

इतनी परेशानियों का सामना करने के बाद कोई भी इन्सान टूट जाता और रामचन्द्र तो पहले भी कई मुश्किलों का सामना कर चुके थे। पर कहते है कि यदि हौसला मजबूत हो तो इंसान किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकता है। रामचन्द्र ने हार नहीं मानी और इस बार उन्होंने V2 रिटेल के नाम से एक बार फिर खुदरा व्यापार का पुनः शुरुआत की।

V2 रिटेल भारत में सबसे जल्दी बढ़ने वाला खुदरा कम्पनियों में से एक है। परिधान और गैर परिधान उत्पादों के एक विशाल रेंज को पेश कर यह कम्पनी आज देश के लगभग 32 शहरों में अपना आउटलेट्स खोल चुकी है। सस्ते और किफायती दामों पर नए फैशन उत्पाद उपलब्ध कराते हुए, आज यह देश की अग्रणी खुदरा कारोबार वाली कम्पनी बन गई है।

रामचन्द्र अग्रवाल ने यह साबित कर दिखाया कि अगर हिम्मत हो तो इंसान कोई भी काम कर सकता है,चाहे वह विकलांग ही क्यों ना हो। रामचन्द्र का यह काम हम सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा है।

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